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कायस्थों का इतिहास

भगवान् श्री चित्रगुप्त, सनातनी के आराध्य चतुर्दश `यम’ देव मे से एक – डा राकेश श्रीवास्तव

शास्त्रों मे यमादि चतुर्दश (१४) देवों का उल्लेख है … इसमें चौदहवें यम के रुप मे श्री चित्रगुप्त जी को माना गया है … दिव्य पितृ तर्पण की तरह पितृतीर्थ से तीन- तीन अंजलि जल, यमों को भी दिया जाता है … ॐ यमादिचतुदर्शदेवाः आगच्छन्तु गृह्णन्तु एतान् जलाञ्जलिन् ।। ॐ यमाय नमः॥१॥ ॐ धर्मराजाय नमः॥२॥ ॐ मृत्यवे नमः॥३॥ ॐ अन्तकाय ...

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भगवान् चित्रगुप्त मनुष्य के मन के देवता है वो वही से आपके सभी कार्यो को जानते है उनका लेखा जोखा रखते है

सृष्टी के निर्माण के बाद उसको परिचालन को लेकर त्रिदेव के समक्ष देवताओं में चर्चा हो रहो थी, चर्चा का विषय था कि कलयुग में मनुष्य की हर मनोकामनाओं को पूरा करने वाली गुप्त चमत्कारी शक्तियों को कहाँ छुपाया जाये। सभी देवताओं में इस पर बहुत वाद- विवाद हुआ। एक देवता ने अपना मत रखा और कहा कि इसे हम ...

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कायस्थ विरोधी है नितीश सरकार – बिहार सरकार की हो गई सच्चिदानंद सिन्हा लाइब्रेरी

चाहे कितने भी दावे कायस्थों की एकता के किये जा रहे हो , कितनी भी बातें हमारी शक्ति की की जा रही हो , कितने भी सम्मलेन किये जा रहे हो पर बिहार मैं कायस्थ समाज की संपत्ति को नितीश  कुमार की अगुयाई वाली सरकार एक के बाद एक हथियाने मैं लगी है I कायस्थ खबर को हाल ही मैं ...

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प्राचीन कामरुप कायस्थ समाज

‘’ हमारे देश का पूर्वोत्तर प्रान्त आसाम प्राचीन काल में महाभारत में प्राग ज्योतिष तथा पुराणों में कामरुप के नाम से विख्यात रहा है। इसका विस्तार दक्षिण में बंगाल की खाड़ी और गोहाटी के निकट कामाख्या देवी का मंदिर इसका केन्द्र रहा है। श्री नगेन्द्र नाथ बसु द्वारा लिखित ‘सोशल हिस्ट्री ऑफ कामरुप’ के अनुसार प्राच्य विधा महार्नव से कन्नौज ...

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“केवल कायस्थों के ही नहीं बल्कि सभी के हैं भगवान् श्री चित्रगुप्त जी”

दुनिया में न्याय व्यवस्था के संचालन और लेखा जोखा रखने के लिए ही ब्रह्मा जी काया से  भगवान श्री चित्रगुप्त जी की उत्पत्ति हुई, श्री चित्रगुप्त भगवान समाज को व्यवस्थित करने में न्यायविद के रूप में सामने आते है यानी की उनके सामने सभी एक सामान और एक जैसे है | जिस ने भी इस धरती पर मानव रूप में ...

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श्री चित्रगुप्तजी (कायस्थ) का वर्ण निर्णय

सर्वत्र यह सुनने को मिलता है कि ब्रह्मा ने चार वर्णो ब्राह्मण्, क्षत्रिय , वैश्य तथा शुद्र कि रचना कि तत्पश्चात चित्रगुप्त क अविर्भाव हुआ। तब तोकायस्थ का पन्चम वर्ण होना चाहिये। किन्तु मनु स्मृति, हारित स्मृति, मिताक्षरा, शुक्रनिति, गरुऱ पुराण , स्कन्द पुराण्, पद्मपुरनआदि किसी भी शास्त्र से पन्चम वर्ण का प्रमाण नही मिलता है । अत: चित्रगुप्तज को ...

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ब्रह्मा के मानस पुत्र है भगवान चित्रगुप्त

कायस्थ खबर नॉएडा I भगवान चित्रगुप्त जी ब्रह्मा के सत्रहवें और अंतिम मानस पुत्र है। ब्रह्मा ने चित्रगुप्त को भगवती की तपस्या कर आर्शीवाद पाने की सलाह दी। तपस्या पूर्ण होने पर वह देवताओं व ऋषियों के साथ आर्शीवाद देने पहुंचे, ब्रह्मा जी ने अमर होने का वरदान दिया। चित्रगुप्त का विवाह क्षत्रिय वर्ण के विश्वभान के पुत्र श्राद्ध देव ...

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श्री चित्रगुप्त जी स्तुति

जय चित्रगुप्त यमेश तव, शरणागतम शरणागतम। जय पूज्य पद पद्मेश तव, शरणागतम शरणागतम।। जय देव देव दयानिधे, जय दीनबन्धु कृपानिधे। कर्मेश तव धर्मेश तव, शरणागतम शरणागतम।। जय चित्र अवतारी प्रभो, जय लेखनी धारी विभो। जय श्याम तन चित्रेश तव, शरणागतम शरणागतम।। पुरुषादि भगवत अंश जय, कायस्थ कुल अवतंश जय। जय शक्ति बुद्धि विशेष तव, शरणागतम शरणागतम।। जय विज्ञ मंत्री धर्म ...

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कायस्थों के प्रचलित सरनेम (उपनाम )

भारत के विभिन्न प्रान्तों में निम्न उपनाम के कायस्थ अधिक रहते हैं | उत्तर भारत अम्बष्ट, अस्थाना, अधोलिया, बाल्मिकी, श्रीवास्तव, खरे, सक्सेना, माथुर, निगम, सूरध्वज, गौंड, भटनागर, कुलश्रेष्ट, कर्ण हैं | दक्षिण भारत मुदलियार, नायडू, पिल्ले, नायर, राज, मेमन, रमन, राव, करनाम, लाल, काणिक, रेड्डी, प्रसाद | राजस्थान  गुप्त, नन्द, शर्मन, फुत्तु, भावेकदानवास, माथुर | बंगाल सेन, कार, पालित, चंद्र, ...

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