
” कायस्थ परिचर्चा एवं संवाद ” – राकेश श्रीवास्तव
कायस्थ समुदाय की एकता और उत्थान के संदर्भ में कायस्थ खबर (आशु भटनागर जी) के द्वारा जो जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, वह वाकई में एक सराहनीय कदम है. दरअसल किसी भी समाज में नवचेतना विकसित करने के लिए जनजागरूकता अभियानों का अपना विशिष्ट महत्व होता है, क्योंकि जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से व्यक्ति मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार होकर खुद को किसी अभियान या आंदोलन से जोड़ता है और उसे सफल बनाने में अपना भरपूर योगदान देता है.सच कहें तो कायस्थ समाज की एकता और उसके सर्वांगीण विकास के लिए आज आंदोलन छेड़ने जैसा ही कदम उठाने की आवश्यकता है. ऐसा इसलिए भी आवश्यक है, क्योंकि कायस्थ समाज टुकड़ों में बंटा हुआ है, और इसके चलते ही उसमें जातीय संचेतना और गौरव का अभाव है. जिस प्रकार आजादी के आंदोलन के दौरान देशवासियों में राष्ट्र प्रेम और एकता की भावना का संचार करने के लिए स्वतंत्रता आंदोलन के अगुवा नेताओं ने धर्म, संस्कृति और विरासत जैसे मूलभूत तत्वों को जनजागरूकता प्रसार के हथियार के रूप में प्रयोग किया, उसी प्रकार हमें भी अपनी जातीय धरोहर, धर्म और संस्कृति का प्रसार कर कायस्थों को एकजुट करने और उनमें जातीय संचेतना विकसित करने का प्रयास शुरू कर देना चाहिए.प्रसन्नता की बात यह है कि कायस्थ खबर विभिन्न परिचर्चाओं, संगोष्ठियों और सभा सम्मेलनों के माध्यम से कायस्थों का एकता और कल्याण के प्रयास का मार्ग आरंभ करने जा रहे हैं. यह एक ऐसा अवसर है, जिसका यदि समुचित और ठोस योजना के साथ कार्यान्वयन किया जाए तो परिणाम बहुत सार्थक और क्रांतिकारी साबित हो सकते हैं. जो कायस्थ संगठन और संस्थाएं ' एकता में ही शक्ति है' जैसे सिद्धांत और नियम में यकीन करते हैं, उन्हें अपना सभी पूर्वाग्रह और संकोच त्याग कर इस प्रयास को सफल बनाने के लिए अब कमर कस कर आगे आ जाना चाहिए. जब सभी लोग एक जगह मिल बैठ कर परिचर्चाओं और संगोष्ठियों में भाग लेंगे, सकारात्मक नतीजे निकलने में जरा सी भी देर नहीं लगेगी.
- जय चित्रांशी
-राकेश श्रीवास्तवAshu ji ka prayas accha hai. Mera poora sahyag aur samarthan rahega.- RK Sinha, MP