Check the settings
Templates by BIGtheme NET
Home » चौपाल » भड़ास » कायस्थ एकता “एक प्रयास” – विवेक श्रीवास्तव

कायस्थ एकता “एक प्रयास” – विवेक श्रीवास्तव

दुनिया में न्याय व्यवस्था के संचालन और लेखा जोखा रखने के लिए ही हमारे कुल देवता,कुल पिता भगवान श्री चित्रगुप्त जी का जन्म हुआ,जिनके वंशज होने पे हमे गर्व है | हमारा इतिहास गवाह है की कायस्थ समाज ने देश को स्वामी विवेकानंद,सुभाष चंद्र बोश,डॉ. राजेंद्र प्रसाद,लाल बहह्दुर शास्त्री जी और इनके जैसे अनेकों महान विभूतिया दी हैं | लेकिन आज की व्यवस्था में हमारा कायस्थ समाज कहीं नहीं रह गया है | आज हम देख रहे हैं की राष्ट्रीय/प्रदेश स्तर पर हमारे समाज का कोई भी ऐसा सर्वमान्य नेता नहीं है जिसके साथ खड़े होकर हम आज वोट तंत्र में अपनी पहचान बना सकें | गौरवशाली अतीत की याद मन में संजोये हम अपने समाज को क्या यूहीं मिटने दे और हर दिन हाशिए पर धकियाते देखते रहंगे या गंभीरता से कोई ऐसी सकारात्मक पहल करेंगे जिससे हम एक मजबूत और शसक्त समाज का पुख्ता धरातल बना सकें ? कायस्थ वंश के लोगों को अपनी समस्या के समाधान का एकमात्र उपाय अपने वंश को मजबूत करना है,अपने भीतर सकारात्मक सोच पैदा करने है | लोकतंत्र में बिना एकता के सामाजिक स्तर पाना कठिन है | अपने लिए, अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए अब बहुत ही जरूरी है की पूरे देश में कायस्थों को एकसूत्र में बाँधा जाये और इस कार्य में युवायों को आगे बढ़कर जिम्मदारी लेनी होगी, इस संचार क्रांति के युग में हम मोबाइल, इन्टरनेट, सोशल नेटवर्क, विडियो कांफ्रेंसिंग के द्वारा हम अपने विचार, सन्देश बहुत ही कम समय में आदान प्रदान कर सकते है, सभी से बराबर संपर्क में रह सकते है कभी भी और कही से भी और एक “कायस्थ एकता क्रांति” ला सकते है | देश के ७०० जिलो में से यदि हिंदी प्रदेश के ४०० जिलो को ही ले तो उन जिलो में कायस्थ वंशजो के औसतन ३-४ संघठन है, यदि उन सभी को एकसूत्र में पिरोकर आपसी सौहार्द बना ले, तो एक बड़ी ताकत बनते देर नहीं लगेगी, जिसके लिए हमे अपने जिलों में युद्ध स्तर पर काम करना है, और बहुत जरूरी ये है की शहर के साथ-साथ ग्रामीण झेत्रों के कायस्थों को भी जोड़ना है जो की अक्सर अनदेखे कर दिए जाते है | अपनी नीव मजबूत कर के ही हम देश में मजबूत और शसक्त समाज का पुख्ता धरातल बना पाएंगे | “कायस्थ” कोई जाती विशेष नहीं है बल्कि पूरी की पूरी संस्कृति है,वह धारा जो सीधे श्री चित्रगुप्त भगवान से जुड़ती है | ब्रह्मा जी की “काया” से निकलने वाले श्री चित्रगुप्त भगवान समाज को व्यवस्थित करने में न्यायविद के रूप में सामने आते है यानी की उनके सामने सभी एक सामान और एक जैसे है | भगवान श्री चित्रगुप्त जी के मंदिर लगभग सभी उन जिलो में है जहां कायस्थ विराजमान है, और उन मंदिरों की क्या स्थिति है किसी से छुपी नहीं है, कोई वहा नहीं जाता, जब हम अपने ही कुल पिता ,कुल देवता के प्रति आस्था और श्रद्धा नहीं रखेंगे फिर वो हमारा कल्याण कैसे करेंगे और ये एक बहुत बड़ा कारण है कायस्थों में बिखराव का,कायस्थों में एकता न होने का | आज पूरे समाज को एकजुट करने का महाभियान है जिसमे आप सभी की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है | एकजुट होने पर ही हम अपनी पहचान को बनाये रखने के साथ ही भगवान श्री चित्रगुप्त जी के सिधान्तों के आधार पर समता और समंव्यतामूलक समाज की स्थापना कर सकते है,यही समय की मांग है | जय श्री चित्रगुप्त भगवान की !   विवेक श्रीवास्तव जिला मंत्री –कायस्थ.कॉम,नॉएडा,लखीमपुर,-खीरी कार्यकारणी सदस्य –कायस्थ युवा कमेटी-लखीमपुर-खीरी कार्यकारणी सदस्य-युवा अखिल भारतीय कायस्थ महा सभा –दिल्ली-एन.सी.आर. पूर्व महासचिव –नॉएडा चित्रगुप्त सभा

आप की राय

आप की राय

About कायस्थ खबर

कायस्थ खबर(http://kayasthakhabar.com) एक प्रयास है कायस्थ समाज की सभी छोटी से छोटी उपलब्धियो , परेशानिओ को एक मंच देने का ताकि सभी लोग इनसे परिचित हो सके I इसमें आप सभी हमारे साथ जुड़ सकते है , अपनी रचनाये , खबरे , कहानियां , इतिहास से जुडी बातें हमे हमारे मेल ID kayasthakhabar@gmail.com पर भेज सकते है या फिर हमे 7011230466 पर काल कर सकते है अगर आपको लगता है की कायस्थ खबर समाज हित में कार्य कर रहा है तो  इसे चलाने व् कारपोरेट दबाब और राजनीती से मुक्त रखने हेतु अपना छोटा सा सहयोग 9654531723 पर PAYTM करें I आशु भटनागर प्रबंध सम्पादक कायस्थ खबर