उन्होंने कहा विवेक जी ट्रस्ट के संचालन के लिये जिम्मेदार प्रमुख पदाधिकारी के रूप मे श्रीमती रमन सिन्हा जी (अब आपकी सहयोगी) जिम्मेदार है जिन्होने मेरे ऊपर गबन व घोटाला करने का आरोप लगाया है जिसे आपने प्रकाशित किया है दो न केवल मिथ्या,सत्य से परे और अपमान जनक है बल्कि मानहानिकारक भी है.मै श्रीमती रमन सिन्हा व मेरे मानहानि के जिम्मेदार लोगो के विरूद्ध कानूनी कायर्वाही करने जा रहा हू.उन्हे कोर्ट के समक्ष बताना ही पडेगा .कानूनी नोटिस के बाद आये इस जबाब के बाद रमण सिन्हा का कोई जबाब हमें नहीं मिला है वही चित्रांश वेलफयेर ट्रस्ट की अध्यक्ष रही कुसुम श्रीवास्तव ने भी संजीव सिन्हा पर कई गंभीर आरोप लगाए है कुसुम ने उनपर आरोप लगाते हुए कहा की
24 मार्च को संजीव जी, रमन जी, सृष्टि जी व विनीत जी की ओर से संजीव जी ने ट्रस्ट भंग करके सभी आजीवन और वार्षिक सदस्यों की पूरी राशि और ट्रस्टीज की राशि में से हुए सभी खर्च काट कर शेष बची राशि समान रूप से सभी 10 ट्रस्टीज को देने का सुझाव दिया था. 28 मार्च को धीरेन्द्र जी द्वारा की गई online meeting में 13 ट्रस्टीज ने ट्रस्ट भंग करने और राशि वापस करने के लिए वोटिंग किया. 28 मार्च को संजीव जी, रमन जी, सृष्टि जी व विनीत जी अपने 24 के सुझाव के विपरीत वोट दिया. चूँकि 2/3 के बहुमत से ट्रस्ट भंग करने और राशि वापस करने का फैसला हुआ था इसलिए 30 मार्च को फिजिकल मीटिंग के लिए अनुरोध किया गया, दूसरा विकल्प रविवार 03 अप्रैल रखा, संजीव जी ने 16 अप्रैल को मीटिंग रखने के लिए कहा. कोषाध्यक्ष को 3 माह से ज्यादा समय के लिए लखनऊ से बाहर जाना था. किसी भी संस्था में वित्तीय लेन देन में कोषाध्यक्ष की अहम भूमिका होती है. 31 मार्च से ही कुछ वार्षिक सदस्यों ने राशि मांगनी शुरू किया और तरह तरह के इलज़ाम जैसे घूसखोर पैसे खा गए आदि, लिखना शुरू किया. महासचिव ने किसी भी सदस्य को कुछ नहीं कहा बल्कि आरोपों को हवा ही दी गयी. डॉ. योगिता सक्सेना की रकम ट्रान्सफर के माध्यम से आई थी, जिसके बारे में पता नहीं लग रहा था. बैंक खाता अध्यक्ष, महासचिव व कोषाध्यक्ष द्वारा संचालित था. सदस्यों द्वारा रकम की मांग महासचिव भी पढ़ रही थी. अध्यक्ष व कोषाध्यक्ष पर जब आरोप लगाए जा रहे थे तो उन्होंने एक बार भीं न तो आरोपकर्ता को रोका और न अध्यक्ष व कोषाध्यक्ष को फोन करके सदस्यों की रकम लौटाने के बारे में बात किया. इसके विपरीत संजीव जी मेरे पति के पर्सनल w/app पर लिख कर जेल भेजने, sieze करने, विदेश जाना भूल जाने, न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित करने की धमकी देते रहे. यह धीरेन्द्र जी सहित अधिकाँश ट्रस्टीज को मालूम है. जब आरोपों को सहन करना मुश्किल हो गया और मीटिंग नहीं हो पा रही थी, और कोषाध्यक्ष को जाने की तारीख नजदीक आ गयी तब संयोजक ने अध्यक्ष व कोषाध्यक्ष को हिसाब करके सभी आजीवन व वार्षिक सदस्यों की पूरी राशि और ट्रस्टीज की राशि से हुए खर्च काट कर बची राशि समान रूप से सभी ट्रस्टियों को देने का निर्देश दिया. उसके अनुसार 02 अप्रैल से सदस्यों की राशि सम्बंधित ट्रस्टी के माध्यम से वापस की गई.
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