नेशनल कायस्थ कांफ्रेंस (All India Kayasth Conference) को शिथिल या समाप्त हुए करीब 80 वर्ष से ज्यादा बीत चुके हैं. यह निबंधित संस्था भी नहीं थी. इसके बाईलॉज़ भी अनुपलब्ध हैं. तथा इसके जीवित सदस्य / पदाधिकारी की उपलब्धता की संभावना भी दूर-दूर तक नजर नहीं आती. ऐसे में इसे पुनर्जीवित करने का प्रयास सिर्फ मन को संतोष देनेवाली बात ही हो सकती है.
आइकन विवाद में अब महथा ब्रज भूषण सिन्हा के तीखे सवाल : हरिश्चन्द्र नाम रख लेने से कोई हरिश्चन्द्र नहीं हो जाता, अलग संस्था की क्या जरुरत थी? वर्तमान संस्था में ही आवश्यक सुधार कर कार्य किया जा सकता था
आइकन के स्थापित या पुनर्स्थापित होने पर विवाद बढ़ते ही जा रहे है , इसी क्रम में रांची से विख्यात कायस्थ चिन्तक महथा ब्रज भूषण सिन्हा ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये है I लेखक के विचारों के लिए कायस्थ खबर का उनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है , कायस्थ खबर सभी पक्षों का सम्मान करता है इसलिए सभी को उनका पक्ष रखने की कोशिश करता है -- जानिये महथा ब्रज भूषण सिन्हा ने क्या कहा
नेशनल कायस्थ कांफ्रेंस (All India Kayasth Conference) को शिथिल या समाप्त हुए करीब 80 वर्ष से ज्यादा बीत चुके हैं. यह निबंधित संस्था भी नहीं थी. इसके बाईलॉज़ भी अनुपलब्ध हैं. तथा इसके जीवित सदस्य / पदाधिकारी की उपलब्धता की संभावना भी दूर-दूर तक नजर नहीं आती. ऐसे में इसे पुनर्जीवित करने का प्रयास सिर्फ मन को संतोष देनेवाली बात ही हो सकती है.
नेशनल कायस्थ कांफ्रेंस (All India Kayasth Conference) को शिथिल या समाप्त हुए करीब 80 वर्ष से ज्यादा बीत चुके हैं. यह निबंधित संस्था भी नहीं थी. इसके बाईलॉज़ भी अनुपलब्ध हैं. तथा इसके जीवित सदस्य / पदाधिकारी की उपलब्धता की संभावना भी दूर-दूर तक नजर नहीं आती. ऐसे में इसे पुनर्जीवित करने का प्रयास सिर्फ मन को संतोष देनेवाली बात ही हो सकती है.
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