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कायस्थ युवा बेरोजगार क्यूँ है ? स्टैंडअप कायस्थ युवा स्टैंडअप इंडिया….. जय हो। – आशु भटनागर

एक मित्र हैं अजित सिंह उन्होंने भारत में बेरोजगारी पर अपना व्यू दिया है , आप भी पढ़िये -- 
मेरे मित्र Wolfgang Goetzie जब दो साल पहले आये थे तो उनकी दोस्ती स्कूल के कुछ teachers से हो गयी । मुझसे पूछने लगे , कोई आदमी सिर्फ 7000 रु में या 10,000 रु में survive कैसे कर सकता है इस महंगे समय में । आपको याद है कि एक बार राहुल गांधी ने कहा था कि poverty is a state of mind ........ कितनी गालियां पड़ी थी बेचारे को । सबने दी थी । मैंने भी दी थीं । वो तो चलो गाली महोत्सव था । बेचारे की किस्मत में है ही गाली । सही बात बोले तो भी गाली ही सुनता है । पर बात राहुल गांधी ने 100 टका सही कही थी । Poverty is a state of mind . गरीबी एक मानसिक अवस्था है । इसका आपकी जेब और आपके bank statement से कोई सम्बन्ध नहीं होता । इन प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने वाले ये लोग जो MA, Msc ,Bed , Med करके 7000 रु पे पढ़ा रहे है और ये private Engineering colleges में Btech पढ़े के 7000 रु की नौकरी करने वाले ये इंजीनियर ....... आप इनकी समस्या जानते हैं क्या है ? इन सबको white collar job चाहिए । 18 साल तक रट्टे मार मार के , दांत किटकिटा के Msc Bed करके , लाखों रु खर्च करके डिग्री लेने के बाद 7000 रुपल्ली की नौकरी करने वाला लड़की / लड़का और engineer बस Sir और Madam सुन के खुश हो जाता है । आजकल भारत देश में super cute Moms n Dads बड़े गर्व से बताते है की हमरा लड़का घुरहू जादो इंजीनियरिंग कालिज से Btech कर रहा है । फिर कुछ साल बाद ये बिलकुल नहीं बताता कि लौंडे की नौकरी लगी या नहीं , या लगी तो पगार कितनी है । इसके विपरीत , पटियाला में दानू के अखाड़े के सामने , NIS gate के सामने मोती बाग़ चौराहे पे बैठा राधेश्याम मोची रोज़ाना कम से कम 2000 रु की दिहाड़ी बनाता है । उसके बगल में एक saloon है । उसमे 2 chairs हैं । उसमे एक लड़का सुनील काम करता है । एक दिन मैंने उस से बाल कटाते हुए पूछा , क्या सिस्टम है तेरा यहाँ । बोला कि ये जो दूसरा लौंडा है न , उसका ये saloon है । मैं जो भी काम करता हूँ उसमे 50% मेरा ....... वो बताने लगा कि मेरी दिहाड़ी रोज़ाना average 1000 रु बन जाती है । saloon मालिक की लगभग 1500 रु । उस पूरे सलून की investment होगी बमुश्किल 10 या 20 हज़ार रु । पर समस्या ये है कि ये जूते गाँठना या बाल काटना , ये दोनों blue collar jobs हैं । समस्या ये है कि भारत देश में हम अपने white collar job करने वालों को तो sir sir कहते नहीं थकते , चाहे उसकी जेब में एक रु न हो और साला भूखा मर रहा हो । और अपने इन मेहनत कश blue collar job वालों को , जो कायदे से मोटा पैसा कमाते हैं , उन्हें हम लोग हिकारत से देखते हैं । बहुत कड़वी सच्चाई है ये कि आज भारत में white collar भूखा मर रहा है और blue collar मज़े से अच्छे पैसे कमा रहा है । पर इसके बावजूद लोग blue collar job करना नहीं चाहते । जानते हैं क्यों ? क्योंकि हम उन्हें Sir कह के नहीं बुलाते । 130 करोड़ लोगों के इस मुल्क में सबको white collar job नहीं दी जा सकती । सिर्फ 5 करोड़ लोग ही white collar पाएंगे । बाकी 125 करोड़ को तो Blue collar ही पहनना पडेगा । अब समय आ गया है कि हम लोग इन blue collar वालों को भी सम्मान देना शुरू करें । उनको भी sir कह के बुलाना शुरू करें । और आखिर क्यों न कहें उन्हें Sir ...... वो भी तो मेहनत ही कर रहा है । कोई चोरी चकारी तो नहीं कर रहा ? वो भी तो राष्ट्र की सेवा ही कर रहा है । वो भी तो GDP बना रहा है देश की । उसके हाथ और उसका collar जो काला हुआ है वो मेहनत करने से हुआ है जनाब । उसके अंदर से जो बू आती है वो पसीने की है जनाब ।
जिस आदमी के हाथों में घट्ठे पड़े हों ....... जिसके हाथ काम करने से काले हों ....... वो जिसके शरीर से मेहनत का पसीना टपकता हो ...... उस से इज़्ज़त से हाथ मिलाइये । उसे भी Sir कह के बुलाइये । इन्ही लोगों से भारत है । इन्ही से दुनिया है ।   अब कायस्थ समाज की बड़ी समस्या भी यही है सब नौकरी करना चाहते है चाहे उसमे पैसे कितने भी कम मिले I स्वरोजगार के लिए कोई मेहनत नहीं करना चाहता , करे भी क्यूँ हमें बचपन से समझाया भी यही गया की पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे साहब I ad-brahmam2sअब सबको साहब बनना है क्योंकि उसी में सम्मान है , अब सम्मान ले लो या पैसे कमा लो इसी फर्क ने कायस्थ समाज को पिछले कई  दशको से पीछे किया I फैसला आपके हाथ में है , आज कीमत आईडिया है , आपकी नौकरी सिर्फ जिंदगी को चलाने का माध्यम , IIT दिल्ली से पास आउट 4 लड़के हमारे यहाँ मोबाइल app से खाने की होम डिलीवरी कर रहे है I उन्होंने अपनी राह देख ली है क्या हमने इस और देखना शुरू किया है ? नौकरी मांगो मत , देने के लिए खड़े हो , कोई काम छोटा नहीं है , हम काम में बड़ा स्कोप है , उद्धमशीलता में रिस्क है , दर्द है मगर सफल होने के बाद सम्मान भी है , और संतुष्टि भी I नहीं तो हमेशा हम आरक्षण और मुफ्तखोरी के मुद्दों पर वोट करते रहेंगे और ऐसे ही नौकरी मांगते रहेंगे  स्टैंडअप कायस्थ युवा स्टैंडअप इंडिया..... जय हो। आशु भटनागर  

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