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क्या “कदम” अखिल भारतीय कायस्थ महासभा 5680 का विंग है : आभाकम राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा संस्था के लेटर हेड पर कदम के राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा से उठे सवाल, क्या ओबीसी से आगे और भी सामाजिक मान दांव पर लगा रहें है सुबोध कांत सहाय

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा 5680 सुबोध कांत सहाय गुट के दिन फिलहाल सही नहीं चल रहे हैं बीते कई समय काफी समय से यह लोग गलतियों पर गलतियां कर रहे हैं। सारंग गुट के एसडीएम कोर्ट में वर्चस्व की लड़ाई में पहले ही सारंग गुट के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह सफल होते नजर आ रहा है । बताया जा रहा है कि सुबोध कांत सहाय गुट के कई धुरंधर मौका पड़ने पर कैलाशनाथ सारंग गुट में जा सकते हैं ऐसे में अपनी संस्था के अस्तित्व को बचाने में लगे सुबोध कांत सहाय घुटने जल्दबाजी में एक बार फिर से बड़ी गलती कर दी है

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पत्र में सुबोध कांत सहाय ने डॉ अनूप श्रीवास्तव को अखिल भारतीय कायस्थ महासभा सुबोध कांत सहाय गुट का राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष मनोनीत किया है । यहां तक तो मामला ठीक है लेकिन उसके फौरन बाद ही अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के लेटर हेड में उसी लाइन के बाद उनको कदम का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया है जिसके बाद सवाल यह खड़ा हो रहा है कि बरसों पहले सुबोध कांत सहाय द्वारा अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से कदम यानी कि कायस्थ आदिवासी दलित और मुस्लिम के सामाजिक गठजोड़ को क्या अखिल भारतीय कायस्थ महासभा सहायक गुटका अनुगामी संगठन माना जाए क्या अखिल भारतीय कायस्थ महासभा कायस्थ ओप्पो एस दलित आदिवासी और मुस्लिम समाज के साथ रोटी बेटी के संबंध को स्थापित करने की मान्यता दे रहा है यदि हां तो क्या कायस्थ समाज ऐसे संगठन को स्वीकार कर रहा है और नहीं तो KADAM के राष्ट्रीय अध्यक्ष का मनोनयन अभाकम के लेटर हेड पर कैसे

कहीं ऐसा तो नहीं कायस्थ समाज को अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के नाम पर कुछ लोग अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए समाज के मान सम्मान को दांव पर लगा रहे हैं

आपको बता दें कि कायस्थ समाज इन दिनों समाज के नेताओं के नाम पर बैठे तमाम राजनीतिक महत्वाकांक्षा पाले लोगों द्वारा कायस्थ समाज को ओबीसी बनाए जाने का लगातार विरोध कर रहे हैं ऐसे में तथाकथित महासभा के अध्यक्ष होने का दावा करने वाले सुबोध कांत सहाय अगर कदम जैसे संगठन को कायस्थों के सामाजिक संगठन के लेटर हेड से जारी कर रहे हैं तो निश्चित तौर पर इस को लेकर आने वाले दिनों में विवाद बढ़ेगा

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