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कायस्थ खबर विशेष : जानिए आखिर क्यों ABKM अध्यक्ष सुबोध कांत सहाय पहुंचे आर के सिन्हा के कालेज में जन्मदिन मनाने और क्यों बनाया उनको अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष

22 सितंबर को देहरादून में भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा का 71 वा जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया जिसके बाद 23 तारीख को अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबोध कांत सहाय नहीं अपने साथियों के साथ मिलकर आर के सिन्हा को उनके गुट का अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया जिसके बाद कायस्थ समाज की सभाओं के इस बड़ी राजनीति पर चर्चा होने लगी । देहरादून से लौट रहे abkm के सारंग गुट लोगो के अनुसार उनको आरके सिन्हा का ये कदम समझ नही आया कुछ ने कहा कि भैया को बहला लिया गया है तो कुछ ने कहा कि उनकी स्थिति इससे कमजोर होगी वो पहले से ही सारंग गुट में अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष थे ।

लेकिन इन सब से अलग सब लोग जानना चाहते है कि आखिर परदे के पीछे हुई राजनीति और डील की आखिर कहानी क्या है आखिर कैसे बीते 5 सालो से संगत पंगत चला रहे आर के सिन्हा अचानक से इसके लिए तैयार हो गए है और आखिर क्यों भाजपा के बिलकुल विरोधी विचार धारा कांग्रेस से आने वाले सुबोध कांत सहाय आर के सिन्हा को अपने साथ जोड़ने पर मजबूर हो गए है और अब संगत पंगत का क्या होगा ।

कोरोना के बाद बदली कहानी, राजनैतिक हाशिए ने समाज के लिए किया एक

दरअसल इस पूरी कहानी की शुरुआत 2018 में शुरू होती है जब सुबोध कांत सहाय सारंग गुट से निष्काशित हो कर नई ABKM बनाए एके श्रीवास्तव और उनको धोखा दे कर अपनी ABKM बनाए डा आशीष पारिया के एक होने के बाद अध्यक्ष बनाए गए थे । वरिष्ठ वकील टीपी सिंह के हस्तक्षेप के बाद कोर्ट के बाहर हुए समझौते में पहले यह तय गया गया था एके श्रीवास्तव ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे मगर तिकड़म बाजी के माहिर राष्ट्रीय मंत्री विश्विमोहन कुलश्रेष्ठ ने 2 महीने बाद हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में ऐसा खेल रचा कि कांग्रेस नेता सुबोध कांत सहाय राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गए और 2014 से राष्ट्रीय मंत्री रहे विश्वविमोहन की कुर्सी भी बच गई ।

लेकिन इस विलय के बाद सारंग गुट और सुबोध कांत सहाय गुट में वैधानिकता को लेकर सवाल खड़े हो गए कैलाशनाथ सारंग गुट ने खड़े होकर इस पूरे विलय और सुबोध कांत सहाय को मान्यता देने से इनकार कर दिया लेकिन 2019 में कैलाशनाथ सारंग के बिगड़ते स्वास्थ्य के चलते पटना कायस्थ समाज के बड़े नाम रविनंदन सहाय को अखिल भारतीय कायस्थ महासभा सारण गुट का सर्वसम्मति से अध्यक्ष घोषित कर दिया गया । आर के सिन्हा अपने संबंधों के कारण रवि नंदन सहाय के हमेशा साथ थे । 2020 में कैलाश नाथ का निधन हो गया ।

आर के सिन्हा का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त, सुबोध कांत सहाय कांग्रेस से लोकसभा हारे

इसके साथ ही अप्रैल 2020 में आर के सिन्हा राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया लेकिन कोरोना के कारण पूरा कायस्थ समाज हाइबरनेशन में चला गया था महामारी में लोगो को व्यक्तिगत, सामाजिक और व्यवसायिक तौर पर भारी हुई । बुरे समय में संस्थाओ द्वारा मदद ना मिलने से लोगो में कायस्थ संस्थाओं के प्रति आकर्षण और विश्वाश भी कम हुआ जिसके बाद संगत पंगत की गतिविधियां भी पहले ऑनलाइन फिर बिलकुल ही शून्य हो गई । उधर कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा 2019 का चुनाव हारने के बाद सुबोध कांत सहाय कांग्रेस में लगभग हाशिए पर आ गए ।

कायस्थ खबर के अब कायस्थ बोलेगा कार्यक्रम में साथ आए रविनंदन सहाय और सुबोध कांत सहाय

सितंबर 2020 में कायस्थ खबर द्वारा आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में पहली बार अखिल भारतीय कायस्थ महासभा सारंग गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि नंदन सहाय और दूसरे गुट जिसे हम सहाय गुट भी कह सकते हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबोध कांत सहाय एक साथ एक प्रेम में आए जहां दोनों ने यह संकेत दिए की भविष्य में दोनों गुट एक हो सकते हैं सुबोध कांत सहाय ने स्पष्ट कहा कि रविनंदन सहाय उनके बड़े भाई की तरह हैं और वह आर के सिन्हा और अभिनंदन सहाय तीनों मिलकर समाज की बेहतरी के लिए आगे आएंगे जिसका रवि नंदन सहाय ने भी समर्थन किया

रविनंदन सहाय के आक्समिक निधन से बदली स्थितियां

होनी अनहोनी कई मामलो को वैसा नही रहने देती है, राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि नंदन सहाय की तबीयत जनवरी 2021 में तेजी से बिगड़ने शुरू हुई और आनन-फानन में प्रयागराज के कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट के अध्यक्ष जितेन नाथ सिंह को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की घोषणा की गई 25 फरवरी 2021 में बागी स्टेट के राजकुमार कहे जाने वाले रवि नंदन सहाय का बीमारी के चलते निधन हो गया उनके बाद कार्यकारी अध्यक्ष चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह को पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया । सारंग गुट के लगातार कमजोर होने से यह माना जाने लगा कि सुबोध कांत सहाय जल्द ही सारंग गुट के सभी लोगों को अपने साथ विलय करा कर विश्वविमोहन कुलश्रेष्ठ की महत्वाकांक्षा को उड़ान दे देंगे लेकिन सारंग गुट के महामंत्री रहे निर्मल शंकर श्रीवास्तव और नए अध्यक्ष बने चौधरी जितेंद्र सिंह में अगस्त 2021 में एसडीएम कोर्ट में एक अपील दायर कि डॉ आशीष पारीया और ऐ के श्रीवास्तव के बीच हुए विलय और उसके पहले के झगड़ों के बीच उनका पक्ष ना सुने जाने को लेकर अपना वाद प्रस्तुत किया जिसके बाद एसडीम कोर्ट ने पाया कि इनका पक्ष सही है और उन्होंने इसके लिए 5 अक्टूबर 2021 की सुनवाई की तिथि जारी कर दी इस फैसले के आते ही अखिल भारतीय कायस्थ महासभा सुबोध कांत सहाय गुट में खलबली मच गई कानून के जानकार बताते हैं इस पूरे प्रक्रिया के बाद चौधरी जितेंद्र सिंह का दावा अखिल भारतीय कायस्थ महासभा पर पक्का हो गया और जालसाजी करने वाले कई पदाधिकारी जेल जा सकते है। रवि नंदन सहाय के निधन से पटना में आर के सिन्हा को अखिल भारतीय कायस्थ महासभा पर अधिकार में बहुत नुकसान हुआ जितेंद्र सिंह और आरके सिन्हा के रिश्ते उसने मधुर नहीं थे जितने रवि नंदन सहाय के अध्यक्ष रहते हुए आर के सिन्हा के थे

सारंग गुट के झारखंड अधिवेशन ने बदली स्थिति, सुबोध कांत सहाय मिले आर के सिन्हा से

कानूनी मामले से जीत पक्की मानकर 11-12 सितंबर को झारखंड के जमशेदपुर टाटा नगर में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का राष्ट्रीय अधिवेशन किया गया जिसमें सुबोध कांत सहाय गुट को पहली बार उनके घर में घुसकर चुनौती दी कार्यक्रम में चौधरी नाथ सिंह ने कायस्थ महासभा को आगे चलाने का रोडमैप प्रस्तुत किया वहीं उत्तर प्रदेश में कायस्थों को ओबीसी आरक्षण देने के यूपी सरकार की मंशा के खिलाफ खड़े होकर बयान दिया और कहा कि कायस्थ समाज सक्षम समाज है और किसी भी तरीके के आरक्षण लेने का विरोध करता है

कायस्थ खबर समेत प्रदेश का युवा कर रहा कायस्थों को ओबीसी बनाने का विरोध

बरेली के एक विधायक अरुण कुमार के लिखे एक पत्र जिसके ओबीसी में मुस्लिम कायस्थ में मुस्लिम हटा कर हिंदू करने की मांग का विरोध सब जगह शुरू हो गया लोगो का कहना था कि अरुण क्षेत्र विशेष के विधायक हो सकते है मगर कायस्थ समाज के प्रतिनिधि नही । कुछ लोगो ने अरुण कुमार सक्सेना को बीते दिनों शाहजहांपुर में भाजपा में ओबीसी मोर्चा में बनाए भुर्जी कायस्थ पदाधिकारियों के पक्ष में काम करने के भी आरोप लगाए और आशंका जाहिर की कि कहीं ना कहीं ऐसे भुर्जी कायस्थ के साथ मिलकर अरुण कुमार असली कायस्थों को ओबीसी बनाने की साजिश रच रहे हैं

उत्तर प्रदेश के कायस्थ सरकार के कायस्थों को ओबीसी आरक्षण देने की सोच का विरोध का इस खबर के प्रबंध संपादक आशु भटनागर भी कर रहे है उनके साथ युवा जन समुदाय जुड़ा हुआ था लगातार इसको लेकर सोशल मीडिया पर और जमीन पर काम चल रहा था देहरादून से डॉक्टर ज्योति श्रीवास्तव, लखनऊ से लकी श्रीवास्तव, नीतिश श्रीवास्तव, रत्नेश, वीकांक्षी निगम,वरिष्ठ पत्रकार अतुल श्रीवास्तव जैसे युवा इस विरोध को मुखर तरीके से प्रदर्शित कर रहे थे । नोएडा के तमाम प्रसिद्ध डॉक्टर अधिकारी इस मुहिम में विरोध कर रहे थे लेकिन अचानक आरके सिन्हा इस जनभावना के खिलाफ सरकार के ओबीसी आरक्षण देने के लिए लोगों को आरक्षण के समर्थन में पत्र लिखने के लिए काल करवाने लगे ।

जिसमें से कुछ लोगों ने उनके पत्र को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर दिया । अलीगढ़ के मनोज सक्सेना ने कहा कि आरक्षण से उनको कोई फायदा नही है, पूर्वांचल से सहाय गुट के वरिष्ठ नेता सुभाष श्रीवास्तव भी सहाय गुट के आरक्षण समर्थन को कुछ लोगो का निजी फैसला बता दिए।

इसके बाद आरक्षण लेने के लिए ओबीसी बनने के समर्थक और आरक्षण के खिलाफ लोगों के बीच समाज में एक गहरी खाई बनती गई पहली बार कायस्थ समाज में ओबीसी कायस्थ और कुलीन कायस्थ की अवधारणा का जन्म हुआ । कायस्थ समाज के कई प्रसिद्ध लोगों ने अपने बच्चों की शादियां इस फैसले के आने तक रोक दी । इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार में प्रदेश प्रवक्ता हरीश चंद्र श्रीवास्तव ने भी सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण दिए जाने को लॉलीपॉप बताते हुए विरोध किया जिसके बाद प्रदेश प्रवक्ता अवस्थी ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार का कायस्थों को किसी भी तरीके का ओबीसी मिलाने का प्रयास नहीं कर रही है कायस्थ समाज का देश विदेश में सम्मान है और वह सवर्ण है

सुबोध कांत सहाय गुट अभी तक लोगों से सर्वे के नाम पर अपनी राय देने से बच रहा था लेकिन आरक्षण मामले पर जितेंद्र सिंह के विरोध में आने के बाद सुबोध कांत सहाय गुट को लगा कि यह एक ऐसा मौका है जिसमें आरके सिन्हा को अपने साथ लिया जा सकता है समाज की अस्मिता की जगह अपने राजनैतिक वजूद के लिए दोनों के बीच मीटिंग होनी शुरू हुई । नौकरी से रिटायर हो चुके और राजनैतिक दल चला रहे डा अनूप श्रीवास्तव को सुबोध कांत सहाय ने कायस्थ समाज को आदिवासी, दलित, मुस्लिम से जोड़ने वाले अपने पुराने राजनैतिक संगठन KADAM का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया ।अपने अपने राजनीतिक कैरियर के अंतिम सोपान पर पहुंच चुके कायस्थ नेताओं ने कायस्थ समाज में अपनी खोई भी जमीन पाने के लिए जितेंद्र नाथ सिंह पर दबाव बनाना शुरू किए और यह तय हुआ कि 22 सितंबर को आर के सिन्हा के जन्मदिन पर एक भव्य कार्यक्रम किया जाए जिसमें आरके सिन्हा अखिल भारतीय कायस्थ महासभा सहाय के राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे ।

महाविलय के लिए बैक चैनल से सारंग गुट के अध्यक्ष चौधरी जितेंद्र सिंह को भी संदेश भेजा गया और उन पर दबाव बनाया गया की वह भी देहरादून में इस कार्यक्रम में शामिल हो और सुबोध कांत सहाय को राष्ट्रीय अध्यक्ष मान लें और खुद कार्यकारी अध्यक्ष बन जाए। सूत्रों के अनुसार चौधरी जितेंद्र सिंह ने इस पूरी प्रक्रिया को सिरे से खारिज कर दिया उन्होंने कहा कि कोर्ट में जितने हम जीत रहे हैं ऐसे में इस तरीके के बेमेल गठबंधन या विलय का कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं होगा । साथ ही कैलाश नाथ सारंग के साथ धोखेबाजी करने वालो को रखने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता है

वही भोपाल के सूत्रों के अनुसार अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के कुछ पदाधिकारी कैलाशनाथ सारंग के बेटे विश्वास सारंग के पास मिलने भी पहुंचे ताकि उनको इस कार्यक्रम में लाकर चौधरी जितेंद्र सिंह पर दबाव बनाया जा सके लेकिन 5 घंटे के इंतजार के बाद उनको यह कहकर वापस भेज दिया गया कि वह इस मामले पर कोई बात नहीं करना चाहते

जिसके बाद 22 तारीख को अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के सदस्यों के साथ मिलकर आर के सिन्हा का भव्य जन्मदिन मनाया गया और 23 तारीख को दिन भर चली बैठक के बाद उनको अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया । ऐसे मैं 5 अक्टूबर को कोर्ट के फैसले के बाद यह तय होगा कि आर के सिन्हा और सुबोध कांत सहाय का गठबंधन चौधरी जितेंद्र सिंह के कानूनी दांवपेचो के सामने जीत पाएगा या दोनों ही मामला हार जाने के बाद इस फैसले को जल्दबाजी में लिया मानेंगे। वही ABKM 2150 के संयोजक मनीष कुमार श्रीवास्तव के अनुसार कोर्ट में फैसले में उनके नाम के गलत इस्तेमाल और पत्रों के साथ सहाय गुट पदाधिकारियों ने जो जालसाजी की है इसको लेकर समय आने पर वह अपनी ओर से एक मुकदमा तक कायम कर सकते हैं मनीष ने स्पष्ट कहा कि वह अपनी महासभा का इन सभी महासभा में तभी विलय करेंगे जब विश्वमोहन कुलश्रेष्ठ को महासभा से हटा दिया जाए और पदाधिकारियों की उम्र 65 साल तक रखी जाए उससे ऊपर के सभी लोग संरक्षक की भूमिका में आए ।

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