कायस्थों को ओबीसी में रखने का समर्थन करने वाले कायस्थ ब्राह्मण और ठाकुर नेताओ के हाथो में खेल रहे है । सोशल मीडिया पर ऐसे तमाम आरोप कायस्थ ओबीसी आरक्षण विरोधी लोगो ने लगाए है । कई लोगों का तो यह भी कहना है कि यह लोग ब्राह्मण और ठाकुरो से पैसे लेकर कायस्थों को ओबीसी में शामिल करना चाहते हैं प्रयागराज में तो कई बार ऐसे आरोप लगे हैं कि इस तरह के कुछ कायस्थ पैसे लेकर विपक्षी पार्टियों में खड़े हो गए हैं ताकि ब्राह्मण प्रत्याशी जीत जाए
राष्ट्रीय कायस्थ व्रंद ग्रुप में आदित्य सिन्हा लिखते है
जय कायस्थ
जय सवर्ण एकता
वैसे यह कायस्थ को OBC में शामिल करना सोची समझी राजनीतिक साजिश है।
यूपी में कायस्थ को पिछड़ा वर्ग में शामिल करा के ब्राह्मण और राजपूत को 10 प्रतिशत EWS पर पूर्णत कब्जा देना चाह रहे है। ब्राह्मण-राजपूत की तरक्की का दरवाजा और खुल जाएं और कायस्थ को नौकरियों के संघर्ष और भी बढ़ जाये।
फिर कायस्थ ना घर के रहेंगे और ना ही घाट के
उससे हमारी इज़्ज़त भी कम हो और नौकरी में भी प्रतिनिधित्व कम हो जाये.

वही ऐसे कायस्थ नेताओ का विरोध अब और भी बढ़ रहा है पहले समाजवादी रहे और अपनी पार्टी बना चुके मनोज श्रीवास्तव को लेकर भी तमाम अभद्र टिप्पड़ियो वाले कमेंट सोशल मीडिया पर दिखे है

वही एबीकेएम के नाम से विवादित संस्था चलाने वाले मनीष श्रीवास्तव को लेकर भी सोशल मीडिया पर काफी विरोध हो रहा है । दरअसल मनीष ने 1 साल पहले इस तरह की बात आने पर उसका तमाम विरोध किया था लेकिन इस बार जब ओबीसी आरक्षण सरकार द्वारा देने की अफवाह फैली तो मनीष ने अपना स्टैंड बदल लिया और उसका समर्थन कर दिया जिसके बाद सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर सबसे पहले मनीष लोगों के निशाने पर आए।
फिलहाल भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ने इस मामले पर भाजपा द्वारा कायस्थों को ओबीसी में ना रखे जाने का बयान देकर इस विवाद का पटाक्षेप तो कर दिया है और यह भी राजनीतिक दलों को समझ आ गया है कि वह कायस्थों को ओबीसी में रखने की गलती नहीं करेंगे । इसके साथ ही ब्राह्मण और ठाकुर नेताओं के पैसे पर कायस्थों के खिलाफ साजिश रचने वाले नेताओं की पोल भी फिलहाल समाज के सामने खुल गई है
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