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क्या वाकई अब अखिल भारतीय सवर्ण कायस्थ महासभा बनाने का समय आ गया है ?

देश की सबसे पुरानी कायस्थों की संस्था होने का दावा करने वाली अखिल भारतीय महासभा के 56 गुटों में से एक दावेदार सुबोध कांत सहाय के गुट के महामंत्री विश्व मोहन कुलश्रेष्ठ के नाम से एक ज्ञापन सोशल मीडिया पर घूम रहा है जिसमें कहा गया कि उन्होंने देश के बहुत सारे जगह लोगों से बात करी और उसमें बहुमत से लोगों ने कायस्थों के ओबीसी आरक्षण लेने का समर्थन किया है

सोशल मीडिया पर इसके साथ ही एक और संदेश भी वायरल हुआ जिसमें इसी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कांग्रेस से कायस्थ नेता सुबोध कांत सहाय अपने सखा और भाजपा पूर्व राज्य सभा सांसद आरके सिन्हा के 71 वे जन्मदिन पर लोगों को देहरादून के तीन दिवसीय कार्यक्रम में आमंत्रित करते नजर आए जिसमें 1 दिन कायस्थों को ओबीसी आरक्षण के समर्थन का एजेंडा लागू करने के लिए संवाद नामक कार्यक्रम भी रखा गया

इन दोनों ही बातों के बाद सोशल मीडिया पर आम जनमानस की प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी और लोगों ने सवाल किया कि क्या अब देश को अखिल भारतीय स्वर्ण कायस्थ महासभा अलग से बनाने का समय आ गया है और देहरादून जा रहे तमाम उन नेताओं को उस सवर्ण कायस्थ महासभा से अलग रखा जाए ।

लोगो की प्रतिक्रिया के बाद कायस्थ खबर ने इस पत्र में लिखें कई उपाध्यक्ष और समिति के लोगों से फोन पर बात की तो उन्होंने उस लिस्ट में अपना नाम होने पर अनभिज्ञता जताई और कहा कि वह तो कायस्थों के ओबीसी आरक्षण का लगातार विरोध कर रहे हैं उसके बावजूद इसमें उनका नाम दिया गया है जो लोगों को भ्रमित करने का प्रयास मात्र है

सुप्रसिद्ध भाजपा नेत्री और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पुत्रवधू नीरा शास्त्री ने कायस्थ खबर को फोन पर बताया कि वह दो बार पिछड़ा आयोग की सदस्य रह चुकी हैं और उनके समय में भी ऑफ द रिकॉर्ड ऐसे प्रस्ताव आए थे जिसमें कायस्थों के लिए ओबीसी आरक्षण की चर्चा हुई थी लेकिन तमाम पहलुओं पर बात करने के बाद उन बातों को उसी समय रिजेक्ट कर दिया गया था, वो अपने दावे में कहती हैं कि कायस्थों का एक बड़ा हिस्सा नौकरी में पहले से ही है जिसके कारण ऐसे प्रयास सफल हो पाएंगे इसमें उन्हें संदेह है उन्होंने कहा कि कायस्थ आज समाज के हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत से आगे बढ़ रहे हैं ऐसे में क्यों का समाज के कुछ नेता लगातार ओबीसी आरक्षण की मांग कर रहे हैं यह समझ से परे है उन्होंने भी देहरादून में हो रहे कार्यक्रम में सिर्फ निमंत्रण मिलने की बात को साझा किया मगर उस कार्यक्रम की रूपरेखा से अनभिज्ञता जाहिर की

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा सारंगपुर के एक अन्य पदाधिकारी अरविंद श्रीवास्तव स्पष्ट रूप से कहते हैं कि अब समय आ गया है जब इन सभी नेताओं को मार्गदर्शक मंडल का सदस्य मान लेना चाहिए और युवाओं को कायस्थों की कमान संभाल लेनी चाहिए

ऐसे ही एक अन्य महिला समाजसेवी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उनको तो पता ही नहीं चला कि यह नाम कब लिख गया उन्होंने निमंत्रण भेजने वालों से भी पूछा कि आखिर इस नाम का वहां औचित्य क्या है वही एक और पदाधिकारी अपनी व्यथा बताती हुई कह रही हैं कि समझ नहीं आ रहा है कि कायस्थ समाज को की भावना को दरकिनार करके हमारे राजनेता इस तरीके के काम क्यों करना चाह रहे हैं इसका परिणाम आने वाले समय में इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले नेताओं के लिए नकारात्मक भी हो सकता है

आश्चर्य की बात यह है कि भाजपा कायस्थ नेता के जन्मदिन के कार्यक्रम की तैयारी कांग्रेस का एक नेता द्वारा की जा रही है लेकिन उत्तर प्रदेश जहां चुनाव होने हैं वहां के प्रबल कायस्थ नेता और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री को इस बाबत कोई जानकारी नहीं दी गई शायद उसकी वजह यह निकल कर आ रही है कि उस नेता के बड़े भाई कानूनी रूप से अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और उनके अलावा बाकी सभी महासभा में फिलहाल शून्य है । ऐसे मैं कायस्थ समाज असमंजस में है कि आने वाले समय में वह अपने सम्माननीय नेताओं के अहम को संतुष्ट करने के लिए खुद को ओबीसी बना ले या फिर अपने सवाल अस्तित्व को बचाए रखने के लिए अपने नेताओं को नकार दें ।

वहीं कई लोगों ने श्राद पखवाड़े के समय इस कार्यक्रम को रखने के औचित्य पर ही सवाल उठाएं है लोगो का कहना है 21 सितंबर से ही श्राद शुरू हो रहे है कि ऐसे समय में सभी के यहां किसी ना किसी पूर्वज के लिए पूजा की जाती है उसको छोड़ कर कहीं भी जाना संभव नहीं हैं

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