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कायस्थ बोलता है : जब धीरेन्द्र जी ने सूट व टाई पहनकर पूड़ी छानी व सब्जी बनायी – आनंद श्रीवास्तव

कायस्थ खबर "कायस्थ बोलता है" कायस्थ खबर का एक  प्रसिद कालम है जिसमे उन लोगो के बारे में जानकारी  दी जाती है जो परदे के पीछे रह कर काम कर रहे है I ये एक  कोशिश है समाज के चेहरों को आगे लाने का , मकसद है समाज में सहयोग की भावना को सामने लाने का I अगर आपके पास भी किसी ऐसे कायस्थ के बारे में कोई अच्छा अनुभव है तो  हमें ५०० शब्दों में ईमेल मेल करेंI इस बार की कहानी हमें भेजी आनंद श्रीवास्तव  ने जो  इलाहबाद के धीरेन्द्र  श्रीवास्तव के  अनछुए किस्से के  बारे में बता रहे है

इलाहाबाद महाकुम्भ सन 1999/2000का है कुछ दिन पहले ही भारत मे बिकने वाली मशहुर पत्रिकाये माया,मनोरमा एंव मनोहर कहानियाँ इत्यादि का प्रकाशन समुह मित्र प्रकाशन लि0 बन्द होने के कारण अनेक लोगो के साथ कई कायस्थ भी बेरोजगार हो गये थे तमाम परिवारो के सामने जीवन निर्वाह की समस्या खड़ी हो गई थी! धीरेन्द्र जी ने तत्कालीन मेला जिला अधिकारी श्री जीवेश नन्दन जी से सम्पर्क कर नये बेरोजगार हुऐ कायस्थ युवको को तत्काल राहत दिलाने के लिये माघ मेला क्षेत्र मे रेस्टोरेन्ट खोलने के लिये जमीन आवन्टित करने का अनुरोध किया! आदरणीय जीवेश नन्दन जी के सहयोग से इन आकस्मिक वेरोजगार युवाओ को इलाहाबाद की सुप्रसिद्ध छप्पन भोग को आवन्टित दुकान के बगल मे कार्नर की जमीन आवन्टित की! रेस्टोरेन्ट खोलने के लिये धीरेन्द्र जी ने बैंक कैशियर श्री सुधीर श्रीवास्तव से 40000/चालिस हजार रूपये उधार लिये जिसे मकर संक्रान्ति के नहान के बाद ही हुई आय से ही चुका दिया गया था! अमावस्या के स्नान के एक दिन पूर्व व्वसायिक प्रतिध्वन्दिता के कारण बेरोजगार कायस्थो के रेस्टोरेन्ट के मुख्य हलवाई व उसके सहयोगियो को पैसा देकर हटा दिया गया था इस नयी समस्या का कोई निवारण तत्काल नही बन पा रहा था बिना हलवाई रेस्टोरेन्ट मे खाद्य सामाग्री कैसे बने मौनी अमावस्या का भीषण स्नान सामने था जिससे वो आय होती की आकस्मिक बेरोजगार कायस्थो को अपनी समस्याओ से जुझने मे कामयाबी मिलती! सूट व टाई पहनकर रेस्टोरेन्ट पर आये धीरेन्द्र जी ने सभी युवाओ को संर्घष करने की प्रेरणा दी और स्वंयम मुख्य हलवाई बनकर पूड़ी छानने लगे जो अनवरत अमावस्या का मेला समाप्त होने तक चला महाकुम्भ मे हुई आय और सम्पतियो को सभी युवाओ मे बाँट दिया गया था धीरेन्द्र जी ने ऐक भी पैसा नही लिया! हमारे समाज मे बहुत से सक्षम और मजबूत कायस्थ है अगर इनमे ऐक प्रतिशत भी धीरेन्द्र जी की तरह समर्पण भाव से काम करे तो हमारा समाज बहुत आगे जा सकता है!!!

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