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श्री चित्रगुप्त सभा निजी ट्रस्ट है, सिर्फ गौतमबुद्ध नगर कायस्थ महासभा ही जिले के कायस्थों का प्रतिनिधित्व करती है – अतुल श्रीवास्तव

अतुल श्रीवास्तव I गौतम बुध नगर में सामाजिक और राजनैतिक परिप्क्षेय  में कायस्थों की सामूहिक संस्था कौन सी है I बीते कुछ कायस्थ संस्था  के नाम कुछ निजी संस्थाओ को ही जिले में कायस्थों की संस्था बताने का भ्रम फैला हुआ है I जिसमे कायस्थों को कोई भागीदारी नहीं है I ऐसे ही एक श्री चित्रगुप्त सभा सिर्फ निजी ट्रस्ट है भगवान चित्रगुप्त के नाम से बनी इस संस्था का कायस्थ समाज के प्रतिनिधित्व करने का दावा सही नहीं है तो ऐसे में शहर के किसी भी कायस्थ के नाम को लेकर कहना की वो इनकी संस्था में किसी पद नहीं है हास्यास्पद ही है बता दें कि इन संस्थाओं की सुषाप्तवस्था, निजी स्वामित्व के कारण ही और जबर्दस्त विरोध एवं अक्रोश के कारण ही सामूहिक प्रयास से गौतम बुध  नगर कायस्थ महासभा की नीव पड़ी है, सूत्रों की माने  ये संस्थाए कुछ लोगो की प्राइवेट प्रोपर्टी है,और दूसरी बात ये एक परिवार की ट्रस्ट है ना कि कायस्थ समाज की I इसलिए कोई भी अन्य कायस्थ जो इस ट्रस्ट के परिवार से संबंध नहीं रखता वो इसमें शीर्ष पदाधिकारी नहीं हो सकता है ऐसे में समाज में ले के निजी संस्था में ना होने की  सूचना को जारी करने की प्रासंगिकता ही ख़तम हो जाती है I गौतम बुध नगर में कायस्थ समाज के लोग ये समझ नहीं पा रहे है आखिर एक निजी संस्था कैसे कह सकती है की कोई कायस्थ विशेष उनकी संस्था में नहीं है जबकि इन संस्थाओं ने कोई मेम्बरशिप ड्राइव नहीं चलाई है I कोई कार्यकारणी मीटिंग नहीं है I तो बड़ा सवाल ये है कि इनके साथ कायस्थ समाज है या नहीं एक बात और पूरे सोलह आने सच्ची है की ऐसी निजी संस्थाओं का समाज से कोई लेना देना  नहीं है, कायस्थ समाज का इन संस्था में कोई सीधा दखल नहीं है ऐसे में  बीते  दो तीन वर्षो मे समझ मे आया है इनको चलने वालो को सिर्फ अपना फायदा देखना है, चाहे वो सामाजिक हो  या राजनीतिक गौतम बुध नागर कायस्थ महासभा ऐसे ही निजी हसरतो से अलग समाज के लिए समाज के लोगो के द्वारा बनाई गयी संस्था है I इसलिए अगर कोई भी निजी संस्था किसी कायस्थ के लिए ये कहे की वो उनकी निजी संस्था से नहीं जुडा है तो उसका कोई सामाजिक महत्व नहीं I इसलिए आज बड़े  सवाल ये है की ..

आखिर उन्होंने पुरानी समाजिक संस्था को ख़तम करके उसी  से मिलते जुलते  नाम से अपनी परवरिक ट्रस्ट  बनाने की आवश्यकता क्यूँ समझी ?

आखिर पुरानी संस्था के लोगो का नाम निजी संस्था में कैसे लिख दिया गया I

आखिर क्यूँ उनके महासचिव उनकी संस्था के कार्यक्रमों में उपस्थित नहीं होते है ?

  इस सवालों के जबाब आने वाले दिनों में गौतम बुध नगर में कायस्थ समाज को खोजने ही होंगे लेखक स्वतंत्र पत्रकार है

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