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मुख्य अथिति, सम्मान समारोह या खाने पीने की चमक दमक से दूर लखनऊ में कायस्थ खबर परिचर्चा एवं संवाद में लोगो ने खुलकर व्यक्त किये अपने विचार

कायस्थ खबर डेस्क I लखनऊ जो अब तक सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मान समारोह , मंत्रियो का मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर ही कार्यक्रम देखता रहा है वहां पहली बार मुख्य अथिति, सम्मान समारोह या खाने पीने की चमक दमक से अलग  कायस्थ खबर परिचर्चा एवं संवाद में  लखनऊ के बुद्धिजीवी लोगो ने अपनी ज़बरदस्त उपस्थति दर्ज की I आध्यात्मिक , बिजनेस , सामाजिक , साहित्य और राजनैतिक विषयों पर हुए विभिन्न सेशन में जहाँ स्पीकर्स  ने विचार रखे वहीं जनता ने भी इन मुद्दों पर अपनी बात ज़बरदस्त तरीके से रखी I आधाय्त्मिक सेशन में कायस्थ पुरोहित अरविन्द मधुकर , कायस्थ वृन्द के राष्ट्रीय संयोजक ब्रजेश श्रीवास्तव और नयी उर्जा नयी शक्ति संगठन के विनय श्रीवास्तव ने भगवान् चित्रगुप्त के जन को लेकर कायस्थ समाज के संगठनो में चल रही आपसी खीचातानी पर जबरदस्त प्रहार किया I गोरखपुर के कपितय लोगो द्वारा चैत्र पूर्णिमा को ही प्राकट्य दिवस बताये जाने को लेकर अरविन्द मधुकर ने स्पस्ट किया की किसी भी वेद पुराण में भगवान् चित्रगुप्त के जनम और प्राकट्य को लेकर कोई भी दस्तावेज नहीं है I वहीं फ़तेहपुर से आये अनिल श्रीवास्तव ने बताया की उजैन में ही भगवान् चित्रगुप्त ने तपस्या की और वही पर वैशाख शुक्ल की सप्तमी को ही उनका प्राकट्य दिवस होता है I इसलिए वही नयायोचित है I इसके बाद धीरेन्द्र श्रीवास्तव  ने कायस्थ वृन्द के जरिये प्रयागराज में एक धर्म संसद कराने का फैसला किया  जिसमे देश भर के संगठनो और धार्मिक विद्वानों को बुलाकर इसको ही सर्वमान्य किया जाए I

बड़ी बात : चैत्र पूर्णिमा पर जन्म को लेकर किसी वेद पुराण में कोई साक्ष्य नहीं  :  अरविन्द मधुकर (कायस्थ पुरोहित ) 

साहियिक सेशन में प्रतिष्ठित हास्य कवि सर्वेश अस्थाना ने साहित्य के क्षेत्र में कायस्थ समाज के लोगो के योगदान पर चर्चा की I उन्होंने भारतीय साहित्य के आरम्भ काल से हिंदी और उर्दू में जनक कहे जाने वाले मुंशी प्रेमचंद  से लेकर कुवर बैचेन , विष्णु सक्सेना और खुद सर्वेश अस्थाना का अभी जिक्र किया की कैसे साहित्य में कायस्थों ने अपना मुकाम बनाया है I

बड़ी बात : कायस्थ खुद इमानदार पर दुसरे कायस्थ  पर विश्वाश नहीं : सर्वेश अस्थाना 

उन्होंने कायस्थ संगठनो पर भी प्रहार करते हुए कहा की ५ सालो तक ये गाते है की कायस्थ प्रत्याशियों को ही कायस्थ वोट करेंगे और बाद में चुनाव के समय सब पार्टियों के एजेंट बन जाते है I इसी सेशन में वीर रस के युवा कवि सौरभ श्रीवास्तव ने भी अपनी बात रखते हुए कहा की कायस्थों को अपने नेता को ही वोट करना चाहए और ये हमें ब्राह्मणों से सीखना चाहए I हालांकि इस पर जनता ने उनसे लखनऊ में ही पूनम सिन्हा को समर्थन ना करने पर सवाल भी किये I जिस पर उन्होंने अपनी पार्टी के राष्ट्र हित में साथ खड़े होने की बात कही बिजनेस सेशन में बरेली से आये पार्षद और उधोगपति दीपक सक्सेना और लखनऊ से मनोज लाल ने कायस्थ युवाओं को बिजनेस में आने को लेकर अपने अनुभव और महत्वपूर्ण जानकारिय दी I दीपक सक्सेना ने बताया की किसी भी बिजनेस में जाने से पूर्व १ साल का प्लान आपका तैयार होना चाहए वहीं कंसल्टेंट  मनोज लाल ने बिजनेस में उतरने से पूर्व उससे सम्बंधित नौकरी करके पहले तैयारी करने पर भी ध्यान दिया

बड़ी बात : पूरी तैयारी, जानकारी के बाद ही बिजनेस करे, सरकारी नियमो का पालन भी करे  : मनोज लाल 

किसी भी दशा में टैक्स बचने की कोशिश ना करे, ५ के अदले ५०००० लगेंगे और समय भी ख़राब होगा : दीपक सक्सेना पार्षद  

दोनों ही वक्ताओं ने कायस्थ युवाओं को सरकारी नियमो का पालन , GST जैसी सर्विस का पूरा सदुपयोग भी करने को कहा I और समझाया की हम अक्सर ५००० रूपए बचाने के लिए ५००० की पेनल्टी में फंस जाते है और बात में कहते है की बिजनेस कायस्थों के बस का अनहि है I लेकिन अगर हम इन सबको सही योजना और तरीके से करें तो बिजनेस आज के दौर में कठिन नहीं है सामाजिक और राजनैतिक उपस्थिति को लेकर बने एक सेशन में प्रगाराज से आये शिव प्रकाश श्रीवास्तव , विनय श्रीवास्तव , पुर्श्पेंद्र श्रीवास्तव , अनिल श्रीवास्तव और धीरेन्द्र श्रीवास्तव ने जबरदस्त तरीके से इस पर सबको एक होने और साथ आने की चर्चा की I पुष्पेन्द्र श्रीवास्तव ने कायस्थ संगठनो पर पार्टी विशेष के लिए ही काम करने के आरोप लगाये तो धीरेन्द्र श्रीवास्तव ने इस बात से इनकार किया और कहा की नेताओं द्वारा संतानो को सिर्फ चुनाव के समय ही याद किया जाता है I वहीं शिवप्रकाश श्रीवास्तव ने बताया की कैसे उन्होएँ राजनीति दलों द्वारा प्रयागराज में कायस्थों को इग्नोर करने पर विरोध में कायस्थ प्र्याशी खड़ा किया और उसको ३००० वोट दिलवाये I पुष्पेन्द्र श्रीवास्तव ने इस बार बताया की लखनऊ में कायस्थों के वोट की बदोलत ही पूनम सिन्हा को २लाख ८० हजार वोट मिल पाए वर्ना समाजवादी पार्टी को अब तक लाख वोट भी नहीं मिलते आये थे I ऐसे में मोदी लहर और सुनामी में भी कायस्थों ने पूनम सिन्हा को जबरदस्त समर्थन किया

बड़ी बात : लखनऊ मे  पूनम सिन्हा को कायस्थों ने भरपूर समर्थन दिया : पुष्पेन्द्र श्रीवास्तव, कांग्रेस नेता  

इस पर दीपक सक्सेना ने कायस्थ संगठनो और नेताओं के साथ साथ लखनऊ की कायस्थ बाहुल्य जनता पर भी प्रहार करते हुए कहा की उन्होंने बरेली में १० पार्षद और १ विधायक बनाया हुआ है क्योंकि कायस्थ राजनैतिक दलों से अलग एक साथ है वहीं लखनऊ में सिर्फ 2 पार्षद है I उन्होंने लखनऊ की तरह ही रणनीति बनाय एजाने का सुझाव दिया I लखनऊ के सामाजिक संस्था के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश खरे ने संगठनो की एकता के लिए सभी मतभेद भुलाने की बात कही जिससे राजनैतिक तोर पर एकजुटता को साबित किया जा सके वहीं समाज सेवियों में वरिष्ठ कायस्थ नेता विनोद बिहारी वर्मा का स्वीकृति देने के बाबजूद ना आना भी चर्चा का विषय रहा  I कायस्थ खबर की टीम उनके संगठन के राहुल सेन सक्सेना और वर्मा जी दोनोंको लगातार फ़ोन करते रहे लेकिन वो नहीं आये I लोगो ने बाद में बताया की कायस्थों नेताओं की मूल भावना  मुख्य अतिथि बन्ने  की रहती है  तो ऐसे में मीडिया के साथ चर्चा करना नेताओं को शायद ही रास आये I इस पर  कायस्थ खबर के प्रबंध समापक आशु भटनागर ने एक और रहस्यउद्घाटन करते हुए बताया की विनोद बिहारी जी तो मिल भी लिए थे उनसे लेकिन कायस्थ समाज से बड़े नेता होने का दावा करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के नाती और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह तो ना मिलने का समय दे सके और ना ही कायस्थ खबर के मीडिया कानक्लेव में शामिल होने को लेकर लिखे मेल का जबाब देने  की ज़रूरत समझी I इससे कायस्थ नेताओ का कायस्थ समाज के प्रति रुख का पता चलता है वहीं बिहार से आर जे डी नेता विनोद श्रीवास्तव हीट स्ट्रोक के कारण नहीं आ सके जबकि सुबोध कान्त सहाय समय से फ्लाईट ना मिल पाने के चलते आने में सफल नहीं हुए I आखिर में लोगो ने कायस्थ खबर को धन्यवाद देते हुए जल्द ही फिर से इस कार्यक्रम को लखनऊ के साथ साथ कानपुर , बरेली पटना , प्रयागराज जैसी जगहों पर भी करने का जोर दिया और उम्मीद की कायस्थ समाज को संगठित और प्रभावशाली करने में कायस्थ खबर ऐसी ही भूमिका निभाता रहेगा  

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